अपनी खु़दी में इस तरह तब्दील न हो जाऊं,
बाग़ी हूँ जिनका उनकी तफ़्सील न हो जाऊं.
आपकी बात बज़ा हो कोई,
मेरे डरने की वज़ह हो कोई.
लाख शिकवे हैं दिल को ज़ेहन से,
दिल से ज़ेहन को गिला हो कोई.
ख़ासकर आप चुप रहते हैं के जब,
जान देने पे तुला हो कोई.
तेरे हाथों में शफ़ा हो कोई,
मेरे होठों पे [...]