July 17, 2009

गोया लम्हात इम्तहानों जैसे.

फासले रख न आसमानों जैसे,
अज़ीज़ है मिल दीवानों जैसे.
नरमी आ जायेगी माहौल में भी,
फ़ज़ा में फैल जा अजानों जैसे.
चाँद,तारे,शमाँ का ज़िक्र छेडो,
ये भी हो जाए ना पुरानों जैसे.
बात लगती है दिल को तीर जैसी,
नीम-वा होंठ हैं कमानों जैसे.
सरे-बाज़ार आशना का मिलना,
गोया लम्हात इम्तहानों जैसे.