बंद कमरे में नजारों की फ़ज़ा पायेगा,
मिज़ाज अपना जब भी शायराना पायेगा.
मिज़ाज अपना जब भी शायराना पायेगा.
उसकी आंखों में एक आसमान दिखता है,
ज़मीं पे रहने का वो कुछ तो सिला पायेगा.
ज़मीं पे रहने का वो कुछ तो सिला पायेगा.
यकीं से आपके मस्जिद में ख़ुदा गया,
मुझको शक़ वो दीवारों से निभा पायेगा.
मुझको शक़ वो दीवारों से निभा पायेगा.