સ્વાતંત્ર દિન મુબારક

Friday August 15th, 2014

 

 

GREETINGS FOR
INDEPENDENCE DAY OF INDIA

 

Let us pray for peace & prosperity to our Motherland

 

Don’t forget to sing

 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसिताँ हमारा

ग़ुर्बत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा

परबत वह सबसे ऊँचा, हम्साया आसमाँ का
वह संतरी हमारा, वह पासबाँ हमारा

गोदी में खेलती हैं इसकी हज़ारों नदियाँ
गुल्शन है जिनके दम से रश्क-ए-जनाँ हमारा

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वह दिन हैं याद तुझको?
उतरा तिरे किनारे जब कारवाँ हमारा

मज़्हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोसिताँ हमारा

यूनान-व-मिस्र-व-रूमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाक़ी नाम-व-निशाँ हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

इक़्बाल! कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा!

 

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Better than the entire world, is our Hindustan,
We are its nightingales, and it (is) our garden abodeIf we are in an alien place, the heart remains in the homeland,
Know us to be only there where our heart is.

That tallest mountain, that shade-sharer of the sky,
It (is) our sentry, it (is) our watchman

In its lap frolic where thousands of ponds,
Whose vitality makes our garden the envy of Paradise.

O the flowing waters of the Ganges, do you remember that day
When our caravan first disembarked on your waterfront?

Religion does not teach us to bear ill-will among ourselves
We are of Hind, our homeland is Hindustan.

In a world in which ancient Greece, Egypt, and Rome have all vanished without trace
Our own attributes (name and sign) live on today.

Such is our existence that it cannot be erased
Even though, for centuries, the cycle of time has been our enemy.

Iqbal! We have no confidante in this world
What does any one know of our hidden pain?

 
ALWAYS REMEMBER

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचः ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिक़ोँ का आज जमघट कूचः-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

है लिए हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तय्यार हैं सीना लिये अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ, जिन में हो जुनून, कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोलः सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,
जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम.
जिन्दगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्क़िलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,

जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लढ़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

 

4 Comments

Filed under ઘટના

4 responses to “સ્વાતંત્ર દિન મુબારક

  1. આઝાદ બનવું છે?

  2. ગોવીન્દ મારુ

    सभी देशवासियोँ को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई…
    जय भारत…

  3. આદરણીય વડિલ બહેન.શ્રી પ્રજ્ઞાજુબહેન

    સ્વાતંત્ર્ય દિનની શુભ કામના

  4. ભારતની આઝાદીનો ઈતિહાસ ભવ્ય છે.
    ઉપરના ગીતોમાં એનો અણસાર મળે છે . ઘણાએ બલિદાનો આપ્યા છે .
    ગાંધીજી ની અહિંસક લડત વિશ્વમાં એક મિશાલ બની ગયું છે .
    પેલું ગીત યાદ આવ્યું
    દે દી આઝાદી બીના ખડગ બીના ઢાલ ,સાબરમતી કે સંત તું ને કર દિયા કમાલ …
    પ્રજ્ઞાબેન આપને સ્વાતંત્ર્ય દિનની શુભ કામનાઓ .

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