Author Archives: pragnaju

લાગી રે લગન /

સૌજન્ય Rajendra Trivedi

https://youtu.be/BI4-Dal7kZs

Kaushiki & Parthasarathi – Lagi Lagan2
લાગી રે લગન ભાવમા ડુબકી લગાવી
 
          લાગી રે લગન
          પિયા તોરી લાગી રે લગન
          અરે પિયા તોરી લાગી રે લગન

          રેણ રે ઝુમેલી બરિખન માસની
          રુમઝુમ રેલ્યો અંધકાર
          રેણ રે ઝુમેલી બરિખન માસની
          રુમઝુમ રેલ્યો અંધકાર

          ભીને રે અંચલ ભમતી રાનમાં
          ફૂલની ફોરમનો લઈ ભાર
          વીજને  તેજે  તે પેખું  પંથને
          ઉરમાં એક રે અગન

          લાગી રે લગન
          પિયા તોરી લાગી રે લગન
          અરે પિયા તોરી લાગી રે લગન

          તમરાં બોલે રે તરુવર પુંજમાં
          જલપે ઝરણાં હજાર
          તમરાં બોલે રે તરુવર પુંજમાં
          જલપે ઝરણાં હજાર

          અડધી રાતે યે મનનો મોરલો
          મારો ગાયે રે મલાર
          આભ રે વીંટાયું અવની અંગને
          એવાં મિલને મગન

          લાગી રે લગન
          પિયા તોરી લાગી રે લગન
          અરે પિયા તોરી લાગી રે લગન

          પિયા તોરી લાગી રે લગન
          પિયા તોરી લાગી રે લગન

Leave a comment

Filed under Uncategorized

The Truth About Hand Washing and Bacteria

 

Like a silent, enormous invasion force, bacteria are present everywhere, and usually proliferate most in places that we don’t even think about. We often think of the bathroom, and more specifically, the toilet as being the dirtiest thing in a house, but, this video you will leave you aghast when you realize the truth of where the real dirtiest places are:

 

Leave a comment

Filed under વિજ્ઞાન

No one saves us…

Leave a comment

by | જૂન 27, 2017 · 4:00 પી એમ(pm)

કલ્પના ચાવલા-એક ભારતીય-અમેરિકન અવકાશયાત્રી

Courtesy :funonthenet@yahoogroups.com

તેમણે નાસા એમ્સ સંશોધન કેન્દ્ર પર કામ કરવાનું શરૂ કર્યું. જ્યાં તેણીએ વર્ટિકલ લઘુ ટેકઓફ અને લેન્ડિંગ ખ્યાલો પર CFD સંશોધન કર્યું. ૧૯૯૪માં નાસાએ કલ્પનાની અંતરીક્ષયાત્રી તરીકે પસંદગી કરી ત્યારબાદ કલ્પના ચાવલા માર્ચ ૧૯૯૫માં નાસાના અવકાશયાત્રી કોર્પ્સ જોડાયા હતા અને તે ૧૯૯૬માં પ્રથમ ઉડાન માટે પસંદ થયા. તેમનું પ્રથમ અવકાશી મિશન ૧૯ નવેમ્બરથી ૫ સપ્ટેમ્બર ૧૯૯૭ સુધી એસટીએસ ૮૭ ઉપર પ્રાઇમ રોબોટીક આર્મ આપરેટર તરીકે ફરજ બજાવી. છ અવકાશયાત્રી સાથે સ્પેસ શટલ કોલંબીયા એસટીએસ-૮૭માં ફ્લાઇટ ઉડાન ભરી. કલ્પના ચાવલા પ્રથમ ભારતીય મહિલા અને બીજી ભારતીય અંતરિક્ષયાત્રી વ્યક્તિ હતી. તેના પ્રથમ અવકાશ મિશનમાં ચાવલાએ પૃથ્વીની ૨૫૨ ભ્રમણકક્ષામાં ૧૦.૪ કરોડ માઇલની મુસાફરી કરી અને ૩૭૨ કલાક કરતાં વધુ અવકાશમાં રહ્યા હતા. એસટીએસ-૮૭ પોસ્ટ ફ્લાઇટ પ્રવૃત્તિઓ પૂર્ણ થયા પછી, ચાવલાને અવકાશયાત્રી કચેરીમાં સ્પેસ સ્ટેશન પર તકનિકી કામગીરી સોંપવામાં આવી હતી. ૨૦૦૦માં તેણીએ એસટીએસ-૧૦૭ની ટુકડીના ભાગરૂપે બીજા ઉડ્ડયન માટે પસંદ કરવામાં આવી હતી. ૧લી ફેબ્રુઆરી, ૨૦૦૩ના રોજ ધરતીથી ૬૩ કિલોમીટર દુર પૃથ્વીના વાતાવરણમાં ફરી પ્રવેશ દરમ્યાન સ્પેસ શટલ કોલમ્બીયા તુટી પડતા કલ્પના ચાવલા અને બધા સાત યાન સભ્યોનું ટેક્સાસમાં મૃત્યુ નીપજ્યું હતું

   Kalpana Chawla story,How Kalpana Chawla Died ?? Kalpana chawla death video, shuttle crash

                           https://youtube.com/embed/M9nfvBaSDl8?rel=0
                                      Kalpana’s last message to India  
                          https://youtube.com/embed/L38qPrUFSMQ?rel=0 

 

                                                 Columbia Disaster
                          https://youtube.com/embed/nd2FVuVF4OM?rel=0 
                        
                      
                     
                  
      
            
                
                 Kalpana Chawla First Indian woman in space

Leave a comment

Filed under ઘટના

નિરોગી જીવન માટે

Feb. 09, 2012 – Birmingham, England, United Kingdom – This is the incredible photo of an otter seeking guidance by praying. This once in a lifetime snap was taken by Hertfordshire based photographer Marac Andrev Kolodzinski. Marac had to wait over two hours in the freezing cold before he captured the divine moment. .(Credit Image: © Marac Kolodzinski/Caters News/ZUMAPRESS.com)

THE WHOLE UNIVERSE IS ENJOYING
AND MAKING PRAYERS FOR SHUBH JAGANNATH YATRA ….
ENJOY THE LIFE ON TIMELINE AND THANK TO THY LORD!!!
સૌજન્ય   mahendra thaker <mhthaker@gmail.com>
निरोगी जीवन के लिये
1– 90 प्रतिशत रोग केवल पेट होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2– कुल 13 अधारणीय वेग हैं |
3–160 रोग केवल मांसाहार से होते है |
4– 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5– 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6– 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7– शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8– अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9– ठंडे जल (फ्रिज) और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।
10– मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11– भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12– बाल रंगने वाले द्रव्यों (हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13– दूध (चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14– शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15– गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16– टाई बांधने से आँखों और मस्तिश्क हो हानि पहुँचती है।
17– खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18– खड़े होकर मूत्र-त्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19– भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है।
20– जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21– मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22– पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय (टीबी) होने का डर रहता है।
23– चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
24– तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25– मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26– अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है।
27– हृदय-रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकर-युक्त आटा, छिलके-युक्त अनाज औशधियां हैं।
28– भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29– अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30– मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31– जल सदैव ताजा (चापाकल, कुएं आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32– नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33– चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34– फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35– भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।
36– मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोशकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
37– गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।
38– 14 वर्श से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, बे्रड, समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
39– खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेश्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
40– जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।
41– सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
42– पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
43– खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
44– चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
45– मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
46– कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।
47– बर्तन मिटटी के ही परयोग करन चाहिए।
48– टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना)
49– यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है।
50– निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजन अत्यन्त आवश्यक है।
51– देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।
52– प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का राजा और रात्रि का भिखारी के समान।
आशा है स्वयं के परिवार में भी इसे लागु करेंगे।
 प्रिय स्वीट फॅमिली मेंबर,
अपनी दिनचर्या को बीमार होने के बाद भी तो सही बनाओगे, बेहतर हैं बीमार नहीं हो, ऐसी दिनचर्या बना ले। निश्चित लाभ मिलेगा। मैं स्वम भी प्रयासरत ही आप भी प्रयत्न करना शुरू करे।

Leave a comment

Filed under વિજ્ઞાન, Uncategorized

…forgive

1 ટીકા

by | જૂન 24, 2017 · 7:41 એ એમ (am)

Be kind

1 ટીકા

by | જૂન 23, 2017 · 7:42 એ એમ (am)